सीआईएसएफ के लिए विजन, मिशन, आदर्श वाक्य, लोकाचार, नैतिकता और मूल्यों पर नीति

परिचय

1969 में एचईसीए रांची में एक बड़ी आग की घटना के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अस्तित्व में आया। जिस अद्वितीय अधिदेश के साथ ये बल अस्तित्व आया है यानी सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों की संपत्ति एवम् उनके कर्मचारियों की सुरक्षाए फल स्वरूप पिछले ५० वर्षों में बल ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। सुरक्षा की गतिशील स्वरूप की बदलती मांगो के साथ में चलते हुए एबल विकसित हुआ है तथा अपने द्वारा प्रधान की गई पेशेवर सेवाओं को पुनः उन्मुख एवम् उनके स्वरूप का अद्यतन तथा स्वयं का कायापलट करते हुए एउपक्रम सुरखा बल से बहु. प्रतिभावानए बहु. कार्यए बहु. आयामी बल बना है जो कि भविष्य की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

समूह-II का गठन बल मुख्यालय द्वारा विभिन्न नीति बनाने के लिए किया गया था जैसे:

  1. विजन
  2. मिशन
  3. सिद्धांत
  4. लोकाचार
  5. नैतिकता
  6. मूल्य

जिससे कि सीआईएसएफ के सभी बल सदस्य इन्हे आत्मसात तथा अभ्यास कर भविष्य की सभी चुनौतियों को आत्मविश्वास और व्यावसायिकता के साथ सामना कर सकें।

एक प्रमुख संगठन के रूप में जिसके पास एक बड़ा कार्य बल हैए हमें अपने विजनए मिशनए आदर्श वाक्यए लोकाचारए नैतिकता और मूल्यों को परिभाषित करना चाहिए और उन्हें एक नीति दस्तावेज के रूप में लिखित रूप में रखना चाहिएए ताकि वह एक दिशानिर्देश और संदर्भ बिंदु के रूप में सदस्यों को बताये कि उनसे क्या अपेक्षा हैए कैसे कार्य करें और व्यवहार करें और संगठन को उसका चरित्र और पहचान दें। वही संगठन के उद्देश्यए भावना और चरित्र को परिभाषित करते हैं।


लोकाचार, मूल्य और नैतिकता की नीति की आवश्यकता

सीआईएसएफ अपने अस्तित्व का 50 वां वर्ष मना रहा है यानि गोल्डन जुबली वर्ष मना रहा है। इस अवसर पर यह महसूस किया जाता है कि लोकाचार मूल्य और नैतिकता पर एक नीति और स्पष्ट दिशा स्थापित करने के लिए एक दृष्टि कथन हमारे विचार को सुदृढ़ करने और दिशा प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

एक संगठन की लोकाचार ए मूल्य और नैतिकता नीति

  1. अपने “चरित्र” को आकार देती है।
  2. एक वांछित “पहचान” बनाती है
  3. संगठन की नीतियों और रणनीतियों का मार्गदर्शन करने वाले सिद्धांतों को दिखाती है।
  4. एक मजबूत संगठनात्मक संस्कृति बनाने के लिए ष्साझा मूल्यष् निर्धारित करती है।
  5. “संगठनात्मक लक्ष्यों” को स्पष्ट करने में मदद करती है।
  6. संगठनात्मक प्रदर्शन के लिए मानक” स्थापित करती है।